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आम आदमी बेहाल, अधिकारी मालामाल — व्यवस्था पर बड़ा सवाल


प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था आज एक गंभीर प्रश्न के सामने खड़ी दिखाई देती है—क्या आम नागरिक को बिना सिफारिश और बिना रिश्वत अपना वैध कार्य कराने का अधिकार वास्तव में मिल पा रहा है? दुर्भाग्य से जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि कई विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण आम जनमानस लगातार परेशान हो रहा है।


आज नागरिकों का अनुभव यह बन चुका है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में साधारण कार्य करवाने के लिए पहले कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर फाइल इधर-उधर घूमती रहती है, और अंततः संकेत दिया जाता है कि यदि “काम जल्दी चाहिए” तो अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी। यह व्यवस्था कभी सीधे रिश्वत के रूप में सामने आती है, तो कभी किसी प्रभावशाली व्यक्ति की सिफारिश के रूप में। परिणाम यह है कि ईमानदार और सामान्य नागरिक स्वयं को व्यवस्था के सामने असहाय महसूस करने लगता है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन विभागों का उद्देश्य जनता को समयबद्ध सेवा देना है, वहीं अक्सर प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी जाती है कि व्यक्ति थककर या तो समझौता कर लेता है या फिर महीनों तक प्रतीक्षा करता रहता है। प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी कार्य, स्थानीय निकायों की स्वीकृतियाँ, शिकायत निवारण, पंजीकरण, भुगतान, अनुमोदन—अनेक क्षेत्रों में यही अनुभव सुनने को मिलता है।

यह केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक विश्वास का संकट भी है। जब नागरिक को यह महसूस होने लगे कि नियम केवल कागजों तक सीमित हैं और वास्तविक काम केवल संपर्क या धनबल से होता है, तब लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर होती है। आम व्यक्ति कर देता है, नियमों का पालन करता है, दस्तावेज पूरे करता है, फिर भी उसे अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ता है—यह स्थिति किसी भी स्वस्थ शासन प्रणाली के लिए उचित नहीं कही जा सकती।
अधिकारी और कर्मचारी प्रशासन की रीढ़ होते हैं। यदि वही संवेदनशीलता, समयबद्धता और निष्पक्षता के साथ कार्य करें तो जनता का विश्वास स्वतः मजबूत होगा। लेकिन जब फाइलें बिना कारण रोकी जाएँ, शिकायतों का उत्तर न मिले, या बार-बार अनावश्यक आपत्तियाँ लगाई जाएँ, तब यह धारणा बनती है कि व्यवस्था आम नागरिक की सुविधा के बजाय उसे उलझाने के लिए काम कर रही है।




अब आवश्यकता केवल आलोचना की नहीं, बल्कि ठोस सुधार की है। हर विभाग में डिजिटल ट्रैकिंग, समयसीमा आधारित उत्तरदायित्व, शिकायतों की स्वतंत्र निगरानी, और भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई अनिवार्य होनी चाहिए। नागरिकों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनका कार्य नियमों के अनुसार, समय पर और बिना किसी दबाव के होगा।
एक मजबूत प्रदेश वही है जहाँ कार्यालयों के दरवाज़े आम जनता के लिए सम्मानपूर्वक खुलें, जहाँ काम के लिए सिफारिश नहीं बल्कि पात्रता देखी जाए, और जहाँ ईमानदारी अपवाद नहीं बल्कि सामान्य व्यवस्था बने। जनता केवल सुविधा नहीं मांग रही—वह अपने अधिकारों का सम्मान मांग रही है। ✍️⚖️🇮🇳

Source: OpenAi 

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